राष्ट्रगान तुलना
मोरक्को बनाम ट्यूनीशिया
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साझा विषय
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अलग-अलग भावनाएँ
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26 वर्षों का अंतर
✓
एक ही महाद्वीप
तुलनात्मक विश्लेषण
मोरक्को और ट्यूनीशिया, दोनों अफ़्रीका के देश, अपने राष्ट्रगानों में अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं। मोरक्को का "शरीफी गान" 1956 में लिखा गया था, जबकि ट्यूनीशिया का "मातृभूमि के रक्षक" 1930 का है।
दोनों गानों में स्वतंत्रता के विषय समान हैं। मोरक्को अतिरिक्त रूप से ईश्वर / आस्था, राजतंत्र और एकता की खोज करता है, जबकि ट्यूनीशिया भी युद्ध / लड़ाई और लचीलापन को छूता है।
भावनात्मक स्वर भिन्न हैं: मोरक्को का गान भव्य है, जबकि ट्यूनीशिया का गान उग्र है।
ट्यूनीशिया ने 1987 में अपना राष्ट्रगान बदला, जो राष्ट्रीय पहचान या राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव को दर्शाता है।
साझा विषय
मोरक्को
✝ ईश्वर / आस्था 👑 राजतंत्र 🕊 स्वतंत्रता 🤝 एकता
ट्यूनीशिया
⚔ युद्ध / लड़ाई 🕊 स्वतंत्रता 💪 लचीलापन
साझा विषय:
🕊 स्वतंत्रता
विवरण
| मोरक्को | ट्यूनीशिया | |
|---|---|---|
| रचना वर्ष | 1956 | 1930 |
| अपनाया गया | 1956 | 1987 |
| गीतकार | Ali Squalli Houssaini | Mustafa Sadik al-Rafii / Aboul-Qacem Echebbi |
| संगीतकार | Leo Morgan | Mohammed Abdel Wahab (disputed; also credited to Ahmed Kheireddine) |
| भाषा | ar | ar |
| क्षेत्र | North Africa | North Africa |
गीत साथ-साथ
मोरक्को
النشيد الوطني المغربي
मूल
منبت الأحرار
مشرق الأنوار
منتدى السؤدد وحماه
دمت منتداه وحماه
عشت في الأوطان
للعلى عنوان
ملء كل جنان
ذكر كل لسان
بالروح بالجسد
هب فتاك
لبى نداك
في فمي وفي دمي
هواك ثار نور ونار
إخوتي هيا
للعلى سعيا
نشهد الدنيا
أنا هنا نحيا
بشعار
الله الوطن الملك
अनुवाद
स्वतंत्रता का स्रोत,
प्रकाश का उद्गम,
गौरव का संगम-स्थल और उसका आश्रय,
तुम सदा उसका संगम-स्थल और आश्रय बने रहो!
राष्ट्रों के बीच तुम जीते रहो
उत्कर्ष के प्रतीक बनकर,
हर हृदय में समाकर,
हर जिह्वा पर गूँजकर।
आत्मा और शरीर से,
तुम्हारा पुत्र उठ खड़ा हुआ है,
उसने तुम्हारे आह्वान का उत्तर दिया है।
मेरे मुख में और मेरे रक्त में,
तुम्हारे प्रति प्रेम प्रकाश और अग्नि बनकर उमड़ पड़ा है।
मेरे भाइयो, आओ,
सर्वोच्च के लिए प्रयास करो!
संसार को साक्षी बनने दो
कि हम यहां रहते हैं
अपने आदर्श वाक्य के साथ:
ईश्वर, मातृभूमि, राजा।
ट्यूनीशिया
حماة الحمى
मूल
حماة الحمى يا حماة الحمى
هلموا هلموا لمجد الزمن
لقد صرخت في عروقنا الدما
نموت نموت ويحيا الوطن
لتدو السماوات برعدها
لترم الصواعق نيرانها
إلى عز تونس إلى مجدها
رجال البلاد وشبانها
فلا عاش في تونس من خانها
ولا عاش من ليس من جندها
نموت ونحيا على عهدها
حياة الكرام وموت العظام
حماة الحمى يا حماة الحمى
هلموا هلموا لمجد الزمن
لقد صرخت في عروقنا الدما
نموت نموت ويحيا الوطن
ورثنا السواعد بين الأمم
صخورا صخورا كهذا البنا
سواعد يهتز فوقها العلم
نباهي به ويباهي بنا
وفيها كفا للعلا والهمم
وفيها ضمان لنيل المنى
وفيها لأعداء تونس نقم
وفيها لمن سالمونا السلام
حماة الحمى يا حماة الحمى
هلموا هلموا لمجد الزمن
لقد صرخت في عروقنا الدما
نموت نموت ويحيا الوطن
إذا الشعب يوما أراد الحياة
فلا بد أن يستجيب القدر
ولا بد لليل أن ينجلي
ولا بد للقيد أن ينكسر
حماة الحمى يا حماة الحمى
هلموا هلموا لمجد الزمن
لقد صرخت في عروقنا الدما
نموت نموت ويحيا الوطن
अनुवाद
[अनुवाद का अंश: केवल आरंभिक मुखड़ा और अंतिम पद। संशोधित मूल पाठ के आधार पर पूरे अनुवाद की समीक्षा बाकी है।]
हे मातृभूमि के रक्षकों!
हमारे समय के गौरव के लिए एकत्र हो!
रक्त हमारी नसों में उबलता है,
हम मरते हैं, हम मरते हैं, ताकि मातृभूमि जीवित रहे!
यदि लोग एक दिन जीने की इच्छा करें,
तो भाग्य को अवश्य प्रतिक्रिया देनी चाहिए,
अंधकार को अवश्य छटना चाहिए,
और जंजीरों को अवश्य टूटना चाहिए।
रोचक तथ्य
मोरक्को
- 1. फ्रांसीसी सेना के कप्तान और मोरक्को के शाही रक्षक दल के संगीत प्रमुख लियो मॉर्गन ने संरक्षित राज्य के दौर में यह धुन रची; स्वतंत्र मोरक्को ने इसे अपने राष्ट्रगान के रूप में बनाए रखा।
- 2. राष्ट्रगान के अंतिम शब्द, 'ईश्वर, मातृभूमि, राजा', मोरक्को का आधिकारिक आदर्श वाक्य हैं, जो 2011 के संविधान के अनुच्छेद 4 में दर्ज है।
- 3. गीत के शब्द आधिकारिक रूप से 1970 में ही जोड़े गए, स्वतंत्रता पर धुन अपनाने के चौदह वर्ष बाद; राष्ट्रगान को शब्द देने का विचार तब आया जब मोरक्को ने पहली बार फ़ुटबॉल विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई किया, जो उसी वर्ष मैक्सिको में हुआ।
ट्यूनीशिया
- 1. राष्ट्रगान अश-शब्बी की कविता 'जीने की इच्छा' की आरंभिक पंक्तियों से समाप्त होता है: 'यदि लोग एक दिन जीने की इच्छा करें, तो भाग्य को उत्तर देना ही होगा।' 2011 के अरब वसंत के दौरान अरब शहरों में ये पंक्तियाँ नारों में गूँजीं और तख़्तियों व दीवारों पर लिखी गईं।
- 2. 1958 से 1987 तक ट्यूनीशिया का राष्ट्रगान 'अला ख़ल्लिदी' था। 12 नवंबर 1987 को, बेन अली द्वारा एक रक्तहीन तख़्तापलट में राष्ट्रपति हबीब बूरगीबा को हटाए जाने के पाँच दिन बाद, 'हुमात अल-हिमा' ने उसकी जगह ली।
- 3. मोहम्मद अब्देल वहाब, जिन्हें आमतौर पर इस संगीत का श्रेय दिया जाता है, ने 1951 में लीबिया का राष्ट्रगान 'लीबिया, लीबिया, लीबिया' भी रचा।
- 4. 2011 की क्रांति के बाद अपनाए गए दोनों संविधान 'हुमात अल-हिमा' को राष्ट्रगान घोषित करते हैं: 2014 के संविधान का अनुच्छेद 4 और 2022 के संविधान का अनुच्छेद 11।
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मोरक्को
ट्यूनीशिया